मुजफ्फरपुर. असम की लोकनाट्य शैली अंकया नाटक से देश-दुनिया में पहचान बनाने वाले नाटककार गुनाकर देव गोस्वामी परंपरागत नाटकों के लिये जाने जाते है. चार दिन पूर्व इन्हें राष्ट्रपति ने संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से नवाजा है.

मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव में पहुंचे गुनाकर देव गोस्वामी ने नाटकों को लेकर विस्तृत बातचीत की. गुनाकर देव गोस्वामी ने कहा कि नाटक के क्षेत्र में वे अपने परिवार की नौंवी पीढ़ी हैं. पिता पद्मश्री जतिन गोस्वामी के सानिध्य में उन्होंने अभिनय शुरू किया. उनका पूरा परिवार रंगकर्म से जुड़ा हुआ है. पत्नी को भी संगीत नाटक अकादमी का युवा सम्मान मिल चुका है. गुनाकर देव गोस्वामी ने कहा कि 1991 में उन्होंने पूर्वरंग नाट्य संस्था की स्थापना की, तबसे परंपरागत नाटकों के साथ आधुनिक नाटकों को भी प्रस्तुत कर रहे हैँ.

बिहार में पटना और पूर्णिया में प्रस्तुति दे चुके हैं. मुजफ्फरपुर पहली बार आये हैं. यहां नाटकों के प्रति दर्शकों का रुझान देख कर खुशी हो रही है. इस तरह के आयोजन की निरंतरता होनी चाहिये, तभी नयी पीढ़ी मोबाइल के रील्स की दुनिया से बाहर निकलेगी और अपनी कला-संस्कृति से जुड़ेगी. इसके लिये सरकार के अलावा कला-संस्कृति से जुड़े लोगों को आगे आना होगा.

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