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मुजफ्फरपुर,[संजीव कुमार]। थाने से प्रत्येक दिन गश्ती निकलती है। मगर गश्ती के दौरान पुलिस जीप से उतरने का महिला वर्दीधारियों द्वारा नाम नहीं लिया जाता। पुलिस वाहन पर बैठकर हाथ में लिए मोबाइल पर ही उनकी नजर रहती है। हाथ की अंगुली मोबाइल पर रहता है। नतीजा संदिग्ध गतिविधि वाले व्यक्ति आराम से निकल जाते। मगर उन्हेंं कोई देखने वाला नहीं। ऐसे में अगर कोई घटना घट जाता है तो खानापूर्ति के लिए वाहन जांच शुरू कर दिया जाता। मगर पहले से एहतियातन कोई कदम नहीं उठाया जाता। यह स्थिति जिले के अधिकतर थानों से निकलने वाली गश्ती में देखने को मिल रहा। मगर न कभी साहब और न ही हाकिम को फुर्सत हुई कि वे इसका औचक निरीक्षण कर सके। जबकि मुख्यालय से आदेश है कि गश्ती के दौरान मोबाइल से दूर रहना है। मगर सब आदेश कागज में ही सिमटा है। धरातल पर कुछ और नजर आता।

मंदिर पर खाकी का कब्जा

मंदिर वाले थाने के सामने माता का बड़ा स्थान है। वहां भी भव्य मंदिर बना है। उक्त मंदिर के कई कमरों पर काफी दिनों से खाकी का कब्जा है। पूर्व के कोतवाल ने मजबूरी बताकर मंदिर के पुजारी से जवानों को रहने के लिए जगह की मांग किया था। जगह मिला तो जवान अब वहां से हटने का नाम नहीं ले रहे। वर्तमान के कोतवाल व उपर वाले हाकिम के पास भी इसकी शिकायत पहुंची। मगर कोई कार्रवाई नहीं हो रहा। इसके कारण मंदिर के पुजारी व वहां आने वाले भक्तों को काफी परेशानियों का सामना उठाना पड़ रहा। अब स्थिति यह हो गई कि मंदिर पर थाने के जवान पूरी तरह से कब्जा कर बैठे है। वर्दीधारियों के इस हरकत से इलाके के लोगों में आक्रोश है। मगर साहब है कि सुनते ही नहीं। इसकी शिकायत लेकर लोग महकमे के मुखिया के पास जाने की तैयारी में हैं।

जाम से निजात में ट्रैक्टर को छूट

जाम से निजात दिलाने वाले विभाग की तरफ से ट्रैक्टर को पूरी छूट दे दी गई है। नतीजा शहर के नो इंट्री में ट्रैक्टर व अन्य बड़े वाहनों का धड़ल्ले से परिचालन किया जा रहा। मगर साहब अंजान है। क्योंकि साहब को जाम से सामना नहीं करना पड़ता। उनके काफिले के आगे-पीछे स्कॉर्ट रहता है। इसलिए उनका काफिला आराम से निकल जाता। मगर जाम के झाम से जूझ रहे लोगों की पीड़ा देख प्रतीत होता है कि न शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधर रही, और न ही इसमें सुधार की कोई कोशिश की जा रही। नतीजा हर दिन जनता जाम से जूझ रहे। मगर विभाग के द्वारा वाहनों की धर-पकड़ में कोई कमी नहीं की जाती। हर दिन विभिन्न इलाकों से तरह-तरह के वाहनों को पकड़कर थाने लाया जाता। फिर छुड़ाने के लिए चालान के आर में तरह-तरह का खेल किया जाता। मगर साहब की नजर नहीं।

हाकिम के नाम पर चमका रहे धंधा

साहब के नीचे वाले शहर के एक हाकिम के नाम पर कई लोग अपना धंधा चमका रहे। थाने के बगल वाले मार्केट के कई दुकानदार हाकिम से परिचय की बात बताकर खूब मनमानी करते है। मगर कोई देखने वाला नहीं। अगर शिकायत पहुंच भी जाती है तो सुनवाई नहीं होती। क्योंकि थाने व हाकिम के यहां उसका उठना-बैठना है। इसमें एक व्यक्ति ऐसा है जो हर शाम हाकिम के दफ्तर पर हाजिरी देना पहुंच जाता। उस शख्स ने तो हद पार कर दी, और अपनी गाड़ी पर पुलिस का स्टीकर लगा लिया। रात में पुलिस वाला लाइट चमकाकर चलता है। चार दिन पूर्व रात में गश्ती के दौरान एक वर्दीधारी ने जब उसनकी गाड़ी को रोका। तब पहले तो उसने उसे खूब हरकाया। फिर पुलिस का स्टीकर व लाइट चमकाते हुए अपने आप को पुलिस बताया। साथ ही हाकिम का नजदीकी बताकर हवा-पानी दिया और वहां से निकल गया।

इनपुट : जागरण

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