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मुजफ्फरपुर। जिले में अब घर, दुकान या अन्य कोई भी नया भवन बनाते समय पर्यावरण का विशेष ख्याल रखना होगा। पर्यावरण बचाने व प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्माण के दौरान तय मानकों का पालन करना होगा। जिला पर्यावरण कमेटी इसकी जांच करेगी। उल्लंघन होने पर इन्वॉयरमेंटल प्रोटेक्शन एक्ट से कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, सूबे के सभी जिलों का अब अपना इन्वायरमेंटल प्लान बनना है। इसी कड़ी में मुजफ्फरपुर में भी प्लान तैयार किया जा रहा है। प्रावधान के तहत जिले में एक कमेटी भी बनी है, जो हर तरह के नये निर्माण में पर्यावरण के अनुकूल प्रावधानों को लागू कराएगी।

किसी भी निजी या सरकारी निर्माण में अब पर्यावरण के लिए तय मानकों के अलावा जिला की तरफ से बनाए गए प्रावधानों का भी पालन करना होगा। प्लान बनाने के लिए डीएम की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। इसमें दर्जनभर विभाग को शामिल किया गया है। जिले में किसी भी तरह के नये निर्माण में कमेटी सुनिश्चित करेगी कि पर्यावरण हितों के अनुकूल निर्माण हो रहे हैं या नहीं। यदि निर्माण में पर्यावरण प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया जाता है तो कमेटी इन्वॉयरमेंटल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत जो भी धाराएं होंगी, उसके तहत कार्रवाई करेगी। हर निर्माण के पूर्व अब इन्वायरमेंटल इम्पैक्ट एसेसमेंट कराना होगा। देखा जाएगा कि संबंधित निर्माण से पर्यावरण को क्या खतरा हो सकता है व निराकरण को क्या उपाय लागू किए जाए।

निजी एजेंसी के सहयोग से बना इन्वायरमेंटल प्लान

जिले में इन्वायरमेंटल प्लान के लिए राज्य सरकार ने एक निजी आरएसपी ग्रीन डेवलपमेंट एंड प्रा.लि. से करार किया है। यह एजेंसी राज्य के सभी जिलों में सर्वे का काम पूरा कर चुकी है। इस निजी एजेंसी के सहयोग से प्रत्येक जिला अपने अनुकूल इन्वायरमेंटल प्लान बना रहा है। मुजफ्फरपुर में फील्ड अफसर अर्जित साहा के नेतृत्व में टीम ने सर्वे किया है व 19 अप्रैल को इस मामले में जिला इन्वायरमेंटल कमेटी की पहली बैठक होने जा रही है। इसके बाद तैयार की गई योजना को कार्यरूप देने के लिए आदेश जारी किया जाएगा।

निर्माण में इन मानकों का रखना है ख्याल

नये निर्माण में अब कुल निर्मित जमीन का पांच फीसदी हिस्सा ग्रीनरी के रूप में छोड़ना है। इसके अलावा वर्षा जल संचय की व्यवस्था करनी है। इन सबके साथ घर से नाले की व्यवस्थित निकासी भी अनिवार्य होगी। प्रत्येक घर, दुकान व उद्योग से धुआं निकालने की मात्रा निश्चित होगी और ऊपर निश्चित ऊंचाई तक पाइप से ले जाना होगा। यहां तक की बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल भी पर्यावरण हित के अनुकूल करना होगा।

जिला इन्वायरमेंटल प्लान के लिए कमेटी गठित कर ली गई है। 19 अप्रैल को इसकी पहली बैठक होनी है। जिले में सर्वे का काम पूरा हो गया है और अब प्रावधान बनाकर इसे लागू कराना है। किसी भी नये निर्माण के लिए इन्वायरमेंटल इम्पैक्ट के सूचकांकों का अनुपालन जरूरी होगा अन्यथा कमेटी कार्रवाई करेगी।– अभिषेक कुमार, वन प्रमंडल पदाधिकारी

राज्य सरकार ने आरएसपी ग्रीन डेवलमेंट एंड प्रा.लि.को सभी जिलों के लिए इन्वायरमेंटल प्लान बनाने का जिम्मा दिया है। अबतक 10 जिलों में इसके तहत कार्रवाई शुरू हो गई है। मुजफ्फरपुर में कमेटी गठित कर ली गई है और 19 अप्रैल को पहली बैठक है। पर्यावरण की दिशा में यह बेहद ठोस कदम है।– अर्जित साहा, फील्ड वर्कर, कार्य एजेंसी

क्यों जरूरी है जिले का अपना इन्वायरमेंटल प्लान

मुजफ्फरपुर दुनिया का 21वां सबसे प्रदूषित शहर है। वायु प्रदूषण के कारण यहां स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या पैदा होने का खतरा है। जिले में प्रदूषण के स्तर को कम करने व जीवन स्तर को बेहतर करने के लिए इन्वायरमेंटल प्लान बनाने का आदेश नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को दिया था।

डीएम प्रणव कुमार (अध्यक्ष), डीएफओ अभिषेक कुमार (सदस्य सचिव) के अलावा सदस्य के रूप में नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय, प्रदूषण कार्यालय के क्षेत्रीय अधिकारी, अपर समाहर्ता राजेश कुमार, पंचायती राज अधिकारी सुषमा कुमारी, पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता डेविड चतुर्वेदी, जिला खनन पदाधिकारी घनश्याम झा, लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता मिथिलेश कुमार, जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता, सिविल सर्जन व जिला उद्योग केंद के एमडी परिमल कुमार सिन्हा।

Source : Hindustan

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