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Patna: बिहार में साल 2010 में हुई शिक्षकों की बहाली सरकार के लिए सरदर्द बनी हुई है. इस दौरान बहाली में बड़े पैमाने पर फर्जी डिग्री (Fake Teachers Job) के आधार पर शिक्षकों की बहाली के आरोप लगे हैं. शिक्षक बहाली की खास बात ये रही कि इस बहती गंगा में कई रसूखदारों ने भी अपने हाथ धो लिए. सोमवार को लगे मुख्यमंत्री के जनता दरबार (CM Janta Darbar) में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है.

जहानाबाद जिले के मोदनगंज प्रखंड के अजय शर्मा फर्जी शिक्षकों की बहाली का मामला लेकर जनता दरबार में पहुंचे थे. अजय शर्मा कहते हैं कि उनके पास कई फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति के प्रमाण हैं. उन्होंने कहा कि इस पर हाईकोर्ट से लेकर आरटीआई तक के डॉक्यूमेंट्स मौजूद हैं.

मुख्यमंत्री से मिलकर लौटे अजय शर्मा ने कहा कि इलाके के बीडीओ ने अपने परिजनों को फर्जी डिग्री के आधार पर शिक्षक की नौकरी दिलवा दी. इतना ही नहीं स्थानीय थाने के दारोगा ने भी अपने परिजन को फर्जी डिग्री के आधार पर शिक्षक की नौकरी दिलवा दी. सोचने वाली बात यह है कि जिस साल में संस्थान की तरफ से परीक्षा का आयोजन ही नहीं किया गया, उस वर्ष में उम्मीदवार को उतीर्ण बताकर नियुक्ति कर दी गयी. यही नहीं किसी संस्थान में जिस विषय की पढ़ाई ही नहीं होती है, उसके बावजूद वहां उस विषय में नियुक्ति की गयी है.

अजय शर्मा ने बताया कि साल 2010 से वो मामला उठा रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. जिन शिक्षकों की नियुक्ति फर्जी तरीके से हुई है उन्होंने अपने प्रभाव के कारण शिक्षा विभाग के विजलेंस टीम और विभाग को भी भ्रमित कर रखा है. अजय शर्मा ने शिक्षा विभाग और निगरानी के पदाधिकारी को चुनौती दी है कि उनके प्रमाण को विभाग गलत साबित कर दिखाए.

Source : Zee News

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