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नई दिल्ली: कर्नाटक में बसवराज बोम्मई (Basavaraj Bommai) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल का नेता चुन लिया गया. इसके साथ ही उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही बोम्मई का नाम मुख्यमंत्री बनने वाले उन पिता-पुत्र की जोड़ी में शुमार हो जाएगा जिन्होंने अलग-अलग राज्यों की कमान संभाली है. उत्तरी कर्नाटक से आने वाले लिंगायत नेता बसवराज बोम्मई कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस आर बोम्मई के पुत्र हैं.

पिता रहे थे कर्नाटक के 11वें मुख्यमंत्री

JDS से निकले और बीएस येदियुरप्पा की ‘परछाई’ कहे जाने वाले लिंगायत समुदाय से आने वाले बसवराज सोमप्पा, बोम्मई के पिता एस आर बोम्मई जनता परिवार के दिग्गज नेता थे और वह कर्नाटक के 11वें मुख्यमंत्री भी थे.

बसवराज बोम्मई के पिता एस आर बोम्मई 1988 से 1989 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे थे. 61 वर्षीय बोम्मई पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली सरकार में गृह, कानून, संसदीय एवं विधायी कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. हुब्बल्ली में 28 जनवरी 1960 को जन्मे बसवराज बोम्मई ने मकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. उन्होंने पुणे में तीन साल तक टाटा मोटर्स में काम किया और फिर उद्यमी बने.

बोम्मई क्यों बने बीजेपी की पंसद?

बोम्मई की जाति, शैक्षणिक योग्यता, प्रशासनिक क्षमताएं और येदियुरप्पा व भाजपा के केंद्रीय नेताओं से करीबी इस पद के लिये उनके चयन की प्रमुख वजहों में बताई जा रही हैं. बोम्मई प्रभावशाली वीराशैव-लिंगायत समुदाय से आते हैं और येदियुरप्पा भी इसी समुदाय से हैं. राज्य की कुल आबादी में समुदाय की हिस्सेदारी 16-17 प्रतिशत है और इसे भाजपा के मजबूत वोटबैंक के तौर पर देखा जाता है. उन्होंने अपना राजनीतिक सफर जनता दल से शुरू किया था और दो बार (1997 और 2003) में कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य रहे. वह मुख्यमंत्री जे एच पटेल के राजनीतिक सचिव भी रहे और परिषद में विपक्ष के उपनेता भी रहे.

लंबा है राजनीतिक अनुभव

बोम्मई ने जनता दल छोड़कर फरवरी 2008 में भाजपा का दामन थाम लिया और उसी साल हुए विधान सभा चुनावों में हावेरी जिले के शिगगांव निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए. इसके बाद वह 2013 और 2018 के विधान सभा चुनावों में भी इस सीट से निर्वाचित हुए. परिवार की बात करें तो बोम्मई का विवाह चेनम्मा से हुआ है और उनके एक बेटा व एक बेटी है. भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार में वह जल संसाधन और सहकारिता मंत्री के तौर पर सेवाएं दे चुके हैं. राज्य की सिंचाई परियोजनाओं के बारे में उनकी जानकारी को अक्सर सराहा जाता है.

बोम्मई की ये है हॉबी

बोम्मई को पढ़ना, लिखना, गोल्फ और क्रिकेट पसंद है. वह कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ, धारवाड़ और कर्नाटक वॉलीबॉल संघ, धारवाड़ जिला के अध्यक्ष रह चुके हैं. वह अरुणोदय सहकारी समिति के संस्थापक भी हैं और जयनगर आवासीय सोसाइटी और जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य भी हैं.

कर्नाटक ये पिता-पुत्र भी रहे सीएम

कर्नाटक में एक और पिता-पुत्र की जोड़ी पर कमान रही है. बोम्मई से पहले जिस पिता-पुत्र की जोड़ी ने मुख्यमंत्री का पदभार संभाला और वह है पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा का परिवार. देवेगौड़ा कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रहे हैं. बाद में उनके पुत्र एच डी कुमारस्वामी भी राज्य के मुख्यमंत्री बने.

दक्षिण में करुणानिधि के परिवार का भी नाम

वर्तमान में एक और दक्षिणी राज्य ऐसा है जहां के पिता-पुत्र की जोड़ी इस लिस्ट में शामिल है. तमिलनाडु के वर्तमान मुख्यमंत्री एम के स्टालिन हैं और उनके पिता एम करुणानिधि भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. करुणानिधि के निधन के बाद स्टालिन ने पार्टी की कमान संभाली और पिछले विधान सभा चुनाव में अपनी पार्टी को शानदार सफलता दिलाई और राज्य के मुख्यमंत्री बने. इस सूची में आंध्र प्रदेश के रेड्डी परिवार का भी नाम शामिल है. वहां के वर्तमान मुख्यमंत्री वाई एस जगनमोहन रेड्डी पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी के पुत्र हैं.

ओड़िशा, झारखंड और मेघालय का भी नाम शामिल

ओड़िशा के पटनायक परिवार का नाम भी इस सूची में प्रमुख स्थान रखता है. उनके पिता बीजू पटनायक भी ओड़िशा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. झारखंड में यह कारनामा पिछले विधान सभा चुनाव में जीत हासिल कर हेमंत सोरेन ने कर दिखाया. उनके पिता शिबू सोरेन भी राज्य की कमान संभाल चुके हैं. पिता-पुत्र के मुख्यमंत्री बनने की सूची में पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय का नाम भी शामिल है. वहां के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा का नाम देश के उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों में शामिल है जो अपने पिता के बाद राज्य के शीर्ष पद पर काबिज होने में कामयाब रहे.

यूपी, अरुणाचल और J&K में भी पिता-पुत्र बने CM

पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश ने भी यह कारनामा कर दिखाया है. वहां के मुख्यमंत्री पेमा खांडू हैं और उनके पिता दोरजी खांडू भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. इनके अलावा देश की राजनीति में पिता-पुत्र की और भी जोडि़यां शामिल हैं जिन्होंने अपने-अपने राज्यों में मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली. इनमें उत्तर प्रदेश के मुलायम सिंह यादव और उनके पुत्र अखिलेश यादव, जम्मू कश्मीर के अब्दुल्ला परिवार और महाराष्ट्र के चव्हाण परिवार के नाम शामिल हैं.

अब्दुल्ला परिवार की तीन पीढ़ियों ने किया ‘राज’

अब्दुल्ला परिवार की तो तीन पीढ़ियों को मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य मिला. पहले शेख अब्दुल्ला राज्य के मुख्यमंत्री बने. उनके बाद उनके पुत्र फारूख अब्दुल्ला और फिर उनके पुत्र उमर अब्दुल्ला ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली.महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का नाम भी इस सूची में शुमार है. उनके पिता शंकर राव चव्हाण भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. हरियाणा का चौटाला परिवार भी इस मामले में पीछे नहीं है. देवी लाल के बाद उनके पुत्र ओम प्रकाश चौटाला भी राज्य के मुख्यमंत्री बने.

Source : Zee News

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