Monkeypox: भारत में पहली बार मंकीपॉक्स का एक संदिग्ध मामला केरल से सामने आया है. यूएई से लौटे एक व्यक्ति में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखने के बाद उसे एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है. राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि मरीज के नमूने एकत्रित किए गए हैं और जांच के लिए राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजे गए हैं. उन्होंने बताया कि जांच के नतीजे मिलने के बाद ही मंकीपॉक्स की पुष्टि की जा सकेगी.


मंकीपॉक्स का संदिग्ध मामला आया सामने
जॉर्ज ने कहा कि इस व्यक्ति में मंकीपॉक्स के लक्षण देखे गए हैं और वह विदेश में इस संक्रमण के एक मरीज के करीबी संपर्क में रहा था. उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, मंकीपॉक्स पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाला एक संक्रामक रोग है और इसके लक्षण चेचक के मरीजों के जैसे होते हैं.

जानवरों से मनुष्यों में फैलता है मंकीपॉक्स
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, मंकीपॉक्स एक वायरल जूनोसिस (जानवरों से मनुष्यों में प्रसारित होने वाला वायरस) है, जिसमें चेचक के रोगियों में अतीत में देखे गए लक्षणों के समान लक्षण होते हैं, हालांकि यह चिकित्सकीय रूप से कम गंभीर है. मंकीपॉक्स किसी संक्रमित व्यक्ति या जानवर के निकट संपर्क के माध्यम से या वायरस से दूषित सामग्री के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है. डब्ल्यूएचओ ने कहा कि यह आमतौर पर दो से चार सप्ताह तक चलने वाले लक्षणों के साथ एक आत्म-सीमित बीमारी है.

1970 में आया था पहला मामला
मंकीपॉक्स वायरस घावों, शरीर के तरल पदार्थ, श्वसन बूंदों और बिस्तर जैसी दूषित सामग्री के निकट संपर्क से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है. मानव मंकीपॉक्स की पहचान पहली बार 1970 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में 9 महीने के एक लड़के में हुई थी, जहां 1968 में चेचक को समाप्त कर दिया गया था. तब से, अधिकांश मामले ग्रामीण, वर्षावन क्षेत्रों से सामने आए हैं. डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कांगो बेसिन, विशेष रूप से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में और मानव मामले पूरे मध्य और पश्चिम अफ्रीका से तेजी से सामने आए हैं.

इनपुट : प्रभात खबर

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