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विधान परिषद शून्य काल में एमएलसी प्रो संजय कुमार सिंह ने हटाए गए अतिथि प्राध्यापकों को पुनः बहाल एवं समायोजित करने का मामला उठाया। गांधी मैदान से विधानसभा की ओर मार्च कर रहे अतिथि प्राध्यापकों को रास्ते में पुलिस ने रोक दिया। पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई, बल का प्रयोग करते हुए जबरन कुल दस अतिथि प्राध्यापकों को गिरफ्तार कर लिया गया। देर शाम पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया।

माले विधायक डॉ संदीप सौरभ ने विधानसभा मार्च का नेतृत्व करते हुए कहा कि अतिथि प्राध्यापकों की मांग जायज है। हटाए गए अतिथि प्राध्यापकों को अविलंब पुनर्बहाल किया जाए अन्यथा धरना प्रदर्शन लगातार चलते रहेंगे।

सैकड़ों की संख्या में जुटे महिला अतिथि प्राध्यापकों ने सरकार को महिला विरोधी कहा। दस लाख नौकरी देने का ढोंग रचने वाली सरकार संवेदनहीनता का परिचय देते हुए अतिथि प्राध्यापकों के साथ अन्याय कर रही है। महिला अतिथि प्राध्यापकों ने मांग पत्र सौंपते हुए मुख्यमंत्री से गुहार लगाई कि उनकी सेवा को समायोजित कर सम्मान देने का काम करें. वे शिक्षा के क्षेत्र में बिहार को आगे बढ़ाने का काम करेंगी।

एमएलसी प्रो संजय कुमार सिंह ने विधान परिषद के शुन्य काल में हटाए गए अतिथि प्राध्यापक के मामले को उठाया और उन्हें पुनर्बहाल करने की मांग की। इसके साथ ही यूजीसी के पत्र के आलोक में 20% अधिक सीटों का सृजन कर अतिथि प्राध्यापक को पुनः बहाल करने की मांग की।

अतिथि प्राध्यापकों का प्रतिनिधिमंडल शिक्षा सचिव दीपक कुमार से मुलाकात की और अतिथि प्राध्यापकों के हटाए जाने के मामले पर संज्ञान लेने को कहा। शिक्षा सचिव ने कहा कि विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया जाएगा कि सीटों की समीक्षा कर बचे सीटों पर हटाए गए अतिथि शिक्षकों की अविलंब बहाली करे इसके साथ ही यूजीसी के पत्र के अनुसार स्वीकृत रिक्त सीटों के अतिरिक्त 20% पद सृजन कर अतिथि प्राध्यापकों को व्यवस्थित किया जाएगा। शिक्षा सचिव से मिलने वालों में माले विधायक डॉ संदीप सौरभ, डॉ आदित्य कुमार आनंद, डॉ पीयूष राज, डॉ अशोक चौधरी, डॉ नितेश कुमार, डॉ आमोद प्रबोधी मौजूद थे।

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