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पटना: केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार बुधवार को किया गया. 43 नए चेहरों को कैबिनेट में जगह मिली. इन चेहरों में दो बिहार के हैं. इस बार जेडीयू से पार्टी अध्यक्ष आरसीपी सिंह और एलजेपी पशुपति पारस को मंत्री बनाया गया है. मंत्री बनने के बाद पशुपति तो खुश नजर आ रहे हैं. लेकिन जेडीयू खेमे में सन्नाटा पसर गया है. जिस तरह की खुशी मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद होनी चाहिए थी, वैसी ना मंत्री आरसीपी सिंह में दिख रही और ना ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मे. अभी तक उनकी जो प्रतिक्रिया सामने आ आई है, उसे देख कर ऐसा कहा जा सकता है.


आरसीपी सिंह ने नहीं कहा थैंक्यू


दरअसल, मंत्री बनने के बाद अभी तक आरसीपी सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद नहीं दिया है. ना ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने करीबी को अब तक मंत्री बनने की बधाई दी है. ट्विटर पर भी इन नेताओं ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. इन सब गतिविधियों को देखने के बाद कयासों का दौर शुरू हो गया है. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री और जेडीयू के नेता कैबिनेट में सांकेतिक एंट्री पाकर नाखुश हैं. वहीं, दोनों नेताओं में कोल्ड वार शुरू हो गया है.


नीतीश कुमार ने की थी ये मांग


हालांकि, पटना की सड़कों और जेडीयू कार्यालय के बाहर आरसीपी सिंह को मुबारकबाद देते हुए पोस्टर लगाए गए हैं. लेकिन पार्टी के शीर्ष नेताओं में से किसी ने मंत्रिमंडल में शामिल होने पर प्रतिक्रिया नहीं दी है. ना ही आरसीपी सिंह को शुभकामनाएं दी हैं. गौरतलब है कि 2019 के समय जब कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट चल रही थी, तभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तत्कालीन जेडीयू अध्यक्ष ने कहा था कि कैबिनेट में सांकेतिक नहीं अनुपातिक हिस्सेदारी चाहिए.


मालूम हो कि बिहार में बीजेपी के पास 17 और जेडीयू के पास 16 सांसद हैं. ऐसे में जेडीयू ने कैबिनेट में बराबर के हिस्सेदारी की मांग की थी. लेकिन उस वक्त बात नहीं बन पाई थी. इस बार जेडीयू कोटा से दो नेता ललन सिंह और आरसीपी सिंह के शामिल होने की संभावना थी. लेकिन इस बार भी 2019 वाली ही बात रही और जेडीयू को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा. हालांकि, एक सीट पाकर जेडीयू वाकई संतोष कर लेगी या कोई और फैसला लेगी. ये तो समय ही बताएगा.

Source : abp news

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