एसकेएमसीएच में लावारिस शवों का समय पर अंतिम संस्कार नहीं, मामला पहुँचा मानवाधिकार आयोग

एसकेएमसीएच में लावारिस शवों का समय पर अंतिम संस्कार नहीं, मामला पहुँचा मानवाधिकार आयोग

डीप फ्रीज़र वर्षों से खराब, शवों में आने लगती है दुर्गंध — अधिवक्ता एस.के. झा ने दायर की याचिका

मुजफ्फरपुर। उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल एसकेएमसीएच में लावारिस शवों के साथ अमानवीय व्यवहार और तय समय सीमा के अंदर अंतिम संस्कार नहीं किए जाने का गंभीर मामला अब मानवाधिकार आयोग तक पहुँच गया है। जिले के मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस.के. झा ने इस विषय पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग, पटना में अलग–अलग याचिकाएँ दायर की हैं।

अधिवक्ता झा ने अपनी शिकायत में कहा है कि अस्पताल में लावारिस शव कई-कई दिनों तक — 20 से 30 दिन तक — बिना अंतिम संस्कार के पड़े रहते हैं, जिससे शवों में सड़न शुरू हो जाती है और पूरे परिसर में दुर्गंध फैलने लगती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शव रखने वाला डीप फ्रीज़र वर्षों से खराब पड़ा है, जिसके चलते शवों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था शून्य हो चुकी है। रोजाना बड़ी संख्या में आने वाले शव ऐसे ही खुले में या असुरक्षित हालात में रखे जाते हैं।

झा ने इस स्थिति को मानवता को शर्मसार करने वाला बताते हुए कहा कि यह स्पष्ट रूप से मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में भी एसकेएमसीएच से गंभीर लापरवाही के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें नवजात शिशुओं को कुत्तों द्वारा नोचे जाने जैसी घटनाएँ भी शामिल हैं।

अधिवक्ता एस.के. झा ने आयोग से तत्काल जाँच, जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई, और शव प्रबंधन की व्यवस्था में सुधार लाने की माँग की है।