सरकारी दफ्तरों से आम जीवन तक उर्दू का प्रयोग और सशक्त हो: जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन

सरकारी दफ्तरों से आम जीवन तक उर्दू का प्रयोग और सशक्त हो: जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन

मुजफ्फरपुर। उर्दू भाषा का प्रयोग केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित न रहकर आम लोगों के दैनिक जीवन में भी बेहतर और प्रभावी ढंग से हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यह बात जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कही। वे 29 जनवरी 2026 को डीआरसीसी सभागार, मुजफ्फरपुर में आयोजित फरोग-ए-उर्दू सेमिनार-सह-मुशायरा एवं कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।


जिलाधिकारी ने कहा कि उर्दू एक मीठी और समृद्ध भाषा है, जिसमें रोजगार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। जिले में नियुक्त उर्दू अनुवादकों और शिक्षकों के सराहनीय कार्य से उर्दू पढ़ने वाले छात्रों में रुचि बढ़ी है। उन्होंने इस प्रकार के कार्यक्रमों को हर वर्ष आयोजित करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे भाषा के संरक्षण और संवर्धन को नई दिशा मिलेगी।


कार्यक्रम में राज्य सरकार द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के सतत विकास हेतु चलाई जा रही योजनाओं की भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि राज्य, जिला, प्रखंड और अंचल स्तर पर लागू योजनाओं से अल्पसंख्यक समुदाय को अधिक से अधिक लाभ मिल रहा है।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उप विकास आयुक्त श्री श्रेय अनुपम, बंदोबस्त पदाधिकारी श्री फिरोज अख्तर, नगर आयुक्त श्री रंजीत कुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी श्री इज्तियाज अहमद कासमी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षाविद् उपस्थित रहे।


मुशायरे में प्रसिद्ध शायरों और कवियों—एम. आर. विच्ची, अमीर हैदर अली, सैयद कादरी, महफूज आरिफ, डॉ. शिवगुल्लाह हमदी, गोपाल फलक, डॉ. आरती कुमारी, मो. एजाज अहमद, मो. जुनैद आलम अरबी और मो. नूर आलम—ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया।


कार्यक्रम का संचालन कोषागार पदाधिकारी बैसुर रहमान अंसारी ने किया। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की खूबी यह है कि यहां नदियों की तरह भाषाएं भी आपस में घुलती-मिलती हैं, और जितनी हिंदी हमें प्रिय है, उतनी ही उर्दू भी।


कार्यक्रम के सफल आयोजन में संयोजक इशरत जहां (अनुवाद पदाधिकारी, उर्दू भाषा कोषांग) की अहम भूमिका रही। वहीं वसी अहमद अलहुरी, मो. शकीलुर्रहमान, अमानुल्लाह, रुकैया बानो, चांदनी समर, महताब आलम और अब्दुल हयात करीम ने भी सक्रिय योगदान दिया।


लेखक के रूप में आफरीन हैदर, अफीफा क़मर, आरिफ नसीर, रिजवाना फातमा और मो. रेहान ने सहभागिता निभाई।