मुजफ्फरपुर जिले में पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और अनुशासित बनाने के लिए एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब जिले के सभी पुलिस अधिकारियों और जवानों के लिए ड्यूटी के दौरान ‘फुल यूनिफॉर्म’ में रहना अनिवार्य कर दिया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ वर्दी भत्ता रोकने तक की चेतावनी दी गई है।
एसएसपी ने साफ तौर पर कहा है कि वर्दी ही पुलिस की असली पहचान है। उन्होंने चिंता जताई कि कई बार फील्ड ड्यूटी या थानों में कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में नजर आते हैं, जिससे आम जनता के लिए पुलिसकर्मियों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इससे न सिर्फ आम लोगों में भ्रम की स्थिति बनती है, बल्कि पुलिस की छवि भी प्रभावित होती है।
कांतेश कुमार मिश्रा के अनुसार, वर्दी पहनना केवल एक नियम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब पुलिसकर्मी पूरी वर्दी में होते हैं तो इससे अपराधियों में डर और आम जनता में विश्वास का माहौल बनता है।
इस आदेश को सख्ती से लागू करने के लिए जिले के सभी थानेदारों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। उन्हें अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों के टर्न-आउट और वर्दी की स्थिति पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। साथ ही, एसएसपी ने यह भी स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में वे स्वयं या अन्य वरिष्ठ अधिकारी थानों और पुलिस चौकियों का औचक निरीक्षण करेंगे।
निरीक्षण के दौरान यदि कोई पुलिसकर्मी बिना वर्दी या अस्त-व्यस्त वर्दी में पाया जाता है, तो उसे ‘घोर अनुशासनहीनता’ मानते हुए तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
मुजफ्फरपुर पुलिस अब अपनी पेशेवर छवि को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए एसएसपी ने संकेत दे दिया है कि अब किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। पुलिस लाइन्स से लेकर ग्रामीण थानों तक अब वर्दी की चमक और अनुशासन बनाए रखने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
