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मुजफ्फरपुर, Independence Day 2022: इस स्वतंत्रता दिवस पर कश्मीर में मुजफ्फरपुर का तिरंगा लहराएगा। इसकी आपूर्ति के लिए खादी ग्रामोद्योग आश्रम, श्रीनगर के साथ सहमति बनी है। फिलहाल, 100 कारीगर तिरंगे की सिलाई और चक्र की छपाई में जुटे हैं। करीब 400 तिरंगा भेजने की योजना है।

कश्मीर से आते गर्म कपड़े

ठंड में हर साल जिला खादी बिक्री केंद्र से करीब एक करोड़ के गर्म कपड़ों का कारोबार होता है। इसमें कश्मीर की भागीदारी करीब 25 लाख की होती है। इनमें जैकेट, शाल, स्वेटर, कंबल, मफलर सहित अन्य कपड़े होते हैं। इसके बदले में यहां से करीब डेढ़ लाख मूल्य के तिरंगे को भेजने पर सहमति बनी है। दो आकार (दो गुणा तीन और तीन गुणा साढ़े चार फीट) के तिरंगे का निर्माण हो रहा है। मुजफ्फरपुर जिला खादी ग्रामोद्योग संघ के सचिव बीरेंद्र कुमार के अनुसार आठ जुलाई से तिरंगा भेजने का कार्य शुरू होगा। वस्त्रों की प्रतिदान प्रक्रिया के तहत ऐसा पहली बार होगा।

हरियाणा और राजस्थान भी भेजे जाएंगे तिरंगे

कश्मीर के अलावा हरियाणा, राजस्थान और बिहार के कई शहरों में भी तिरंगा और टेबल व कार फ्लैग भेजने की तैयारी है। इस बार करीब 12 लाख रुपये के कारोबार का लक्ष्य है। पिछले साल प्रयागराज, धनबाद, पानीपत, पटना, मधुबनी समेत कई शहरों में भेजे गए थे। इसमें करीब सात लाख रुपये का कारोबार हुआ था।

खादी वस्त्रों की बिक्री में दो से ढाई गुना वृद्धि

बीरेंद्र कुमार के अनुसार, बीते छह-सात वर्षों में खादी के वस्त्रों की बिक्री दो से ढाई गुना बढ़ी है। गांधी शांति प्रतिष्ठान, दिल्ली के पूर्व सचिव व मुजफ्फरपुर निवासी डा. सुरेंद्र कुमार का कहना है कि खादी के प्रचार-प्रसार में मुजफ्फरपुर खादी ग्रामोद्योग केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह केंद्र डा. राजेंद्र प्रसाद, आचार्य कृपलानी, ध्वजा बाबू की परंपरा को आगे ले जा रहा है।

बाहर से मंगाया जाता बड़े माप का तिरंगा

मुजफ्फरपुर में चार गुना छह फीट के माप का तिरंगा मुंबई और कर्नाटक के हुबली से मंगाया जाता है। इसे बाजार में मुंबइया खादी के नाम से जाना जाता है। पिछले साल साढ़े चार लाख का बेचा गया था, इस बार सात लाख का लक्ष्य है। इसमें एक तिरंगे की कीमत 2900 रुपये है। हालांकि, तिरंगे में स्थानीय बाजार की भी चुनौती मिलती है। खादी के छोटे माप के तिरंगे की कीमत करीब 400 रुपये है, जबकि बाजार में साधारण कपड़े का तिरंगा महज 100 रुपये में मिल जाता है। ऐसे में आमलोग इसे ही खरीद लेते हैं। विभिन्न संस्थाओं में खादी के तिरंगे का ही उपयोग होता है।

इनपुट : जागरण

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