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नई दिल्ली : 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव की शुरुआत कल यानी 10 सितंबर से होने जा रहा है। कल गणेश के दिन गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी जबकि 10वें दिन अनंत चतुर्दशी के मौके पर 19 सितंबर को गणेश पूजन के बाद उनके प्रतिमा का इस भरोसे के साथ विसर्जन किया जाता है कि सबकुछ ठीक रहेगा और अगले साथ फिर उनकी प्रतिमा स्थापित की जाएगी। कई लोग एक दिन, तीन दिन, पांच दिन या सात दिनों के लिये भी गणपति जी को घर पर लाते हैं।

गणपति स्थापना पूजन का शुभ मुहूर्त

इस बार गणपति पूजन का शुभ मुहूर्त दिन में 12 बजकर 17 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त में शुरू होगा और रात 10 बजे तक पूजन का शुभ समय रहेगा। पूजा के समय ‘ॐ गं गणपतये नमः:’ मंत्र का जप करते हुए गणपतिजी को जल, फूल, अक्षत, चंदन और धूप-दीप एवं फल नैवेद्य अर्पित करें। प्रसाद के रूप में गणेशजी को उनके अति प्रिय मोदक का भोग जरूर लगाएं।

सुबह का मुहूर्त- 7:39 से लेकर दोपहर 12:14 तक

दिन का मुहूर्त- दोपहर 1:46 से लेकर 3:18 तक

शाम का मुहूर्त- शाम 6:21 से लेकर 10:46 तक

रात का मुहूर्त- रात 1:43 से लेकर 3:11 तक (20 सितंबर)

प्रातः काल मुहूर्त- सुबह 4:40 से लेकर 6:08 बजे तक (20 सितंबर)

गणेश चतुर्थी पर बन रहे हैं ये खास संयोग

10 सितंबर 2021 को दोपहर 12 बजे से लेकर दोपहर 1 बजे के बीच गणेश स्थापना के लिये अच्छा मुहूर्त है। 10 सितंबर को शाम 5 बजकर 43 मिनट तक ब्रह्म योग रहेगा। इसके अलावा 9 सितंबर दोपहर 2 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 10 सितंबर दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक सभी कार्यों में सफलता दिलाने वाला रवि योग रहेगा। इसके साथ ही दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक चित्रा नक्षत्र रहेगा।

गणेश चतुर्थी पर लग रहा है लाभ वाला भद्रा का साया

गणेश चतुर्थी के दिन इस साल भद्रा का साया भी लग रहा है। गणेश चतुर्थी के दिन 11 बजकर 09 मिनट से रात 10 बजकर 59 मिनट तक पाताल निवासिनी भद्रा रहेगी। शास्त्रों के मुताबिक पाताल निवासिनी भद्रा का होना शुभ फलदायी होता है। इस समय धरती पर भद्रा का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है। दूसरी बात यह भी है कि गणपतिजी स्वयं सभी विघ्नों का नाश करने वाले विघ्नहर्ता हैं इसलिए गणेश चतुर्थी पर लगने वाले भद्रा से लाभ ही मिलेगा।

गणेश पूजन के लिए जरूरी सामग्री

पूजा के लिए चौकी, लाल कपड़ा, भगवान गणेश की प्रतिमा, जल का कलश, पंचामृत, रोली, अक्षत, कलावा, लाल कपड़ा, जनेऊ, गंगाजल, सुपारी, इलाइची, बतासा, नारियल, चांदी का वर्क, लौंग, पान, पंचमेवा, घी, कपूर, धूप, दीपक, पुष्प, भोग का समान आदि एकत्र कर लें।

भगवान गणेश की प्रतिम स्थापना की विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों ने निवृत्त होकर स्नान करे लें। गणपति का स्मरण करते हुए पूजा की पूरी तैयारी कर लें। इस दिन लाल रंग के वस्त्र धारण करें। एक कोरे कलश में जल भरकर उसमें सुपारी डालें और उसे कोरे कपड़े से बांधना चाहिए। इसके बाद सही दिशा में चौकी स्थापित करके उसमें लाल रंग का कपड़ा बिछा दें। स्थापना से पहले गणपति को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद गंगाजल से स्नान कराकर चौकी में जयकारे लगाते हुए स्थापित करें। इसके साथ रिद्धि-सिद्धि के रूप में प्रतिमा के दोनों ओर एक-एक सुपारी भी रख दें।

भगवान गणेश की पूजा विधि

स्थापना के बाद गणपति को फूल की मदद से जल अर्पित करे। इसके बाद रोली, अक्षत और चांदी की वर्क लगाए। इसके बाद लाल रंग का पुष्प, जनेऊ, दूब, पान में सुपारी, लौंग, इलायची और कोई मिठाई रखकर अर्पित कर दें। नारियल और भोग में मोदक अर्पित करें। षोडशोपचार के साथ उनका पूजन करें। गणेश जी को दक्षिणा अर्पित कर उन्हें 21 लड्डूओं का भोग लगाएं। सभी सामग्री चढ़ाने के बाद धूप, दीप और अगरबत्‍ती से भगवान गणेश की आरती करें। इसके बाद इस मंत्र का जाप करें।

गणपति मंत्र का जाप (Ganesha Mantra)

गणपति स्थापित करने के बाद घर में पूरे विधि-विधान के साथ उनकी पूजा की जाती है इस दौरान ‘वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥’ या फिर ‘ऊं गं गणपतये नम:’ मंत्र का जाप जरूर करें।

Source : News24

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