रक्षक ही बने भक्षक: छापेमारी की लूट में फंसी वैशाली पुलिस, SHO और SI निलंबित

रक्षक ही बने भक्षक: छापेमारी की लूट में फंसी वैशाली पुलिस, SHO और SI निलंबित

बिहार में सुशासन के दावों के बीच पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। वैशाली जिले में कानून के रक्षक ही लुटेरे बन बैठे। छापेमारी के दौरान बरामद हुए सोने-चांदी के जेवर और नकदी को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने आपस में बंदरबांट कर लिया। इस गंभीर भ्रष्टाचार पर तिरहुत रेंज के डीआईजी चंदन कुशवाहा ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है।


डीआईजी के निर्देश पर वैशाली एसपी ने लालगंज थाना के थानाध्यक्ष संतोष कुमार और सब-इंस्पेक्टर सुमन कुमार झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामला लालगंज थाना क्षेत्र के बिलनपुर गांव का है, जहां 30 दिसंबर को रामप्रीत सहनी के घर छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में जेवरात और नकदी बरामद हुई थी। नियमानुसार जब्ती सूची बनाकर मालखाने में जमा करने के बजाय दोनों अधिकारियों ने बरामदगी को छिपा लिया।


मामले की शिकायत डीआईजी तक पहुंचने के बाद गोपनीय जांच कराई गई, जिसमें आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जानबूझकर बरामद सामानों को दस्तावेजों में दर्ज नहीं किया गया। डीआईजी ने इसे वर्दी को कलंकित करने वाली घटना बताया।


सूत्रों के अनुसार, निलंबित थानाध्यक्ष संतोष कुमार पहले भी विवादों में रहे हैं, जबकि एसआई सुमन झा को वर्ष 2024 में रिश्वत लेते हुए निगरानी ने रंगेहाथ पकड़ा था। इस कार्रवाई से वैशाली पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है। विभागीय जांच जारी है और जल्द ही प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।