सीएम नीतीश शराबबंदी पर कर रहे थे मीटिंग, वैशाली में नशे में धुत पकड़े गए अधिकारी

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शराबबंदी के बावजूद बिहार में कैसे शराब बेची जा रही है, इसको लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना में बड़ी बैठक कर रहे थे. इसी दौरान वैशाली से बड़ी खबर यह आई कि महनार प्रखंड से जहां आपूर्ति पदाधिकारी अरुण सिंह गिरफ्तार किए गए हैं. खास बात यह है कि उनपर शराब पीकर हंगामा करने का आरोप है. पुलिस की जांच में शराब सेवन करने की हुई पुष्टि हुई है. इसके बाद सहदेई थाना की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है.

बता दें कि अक्सर यह सवाल उठते रहे हैं कि बिहार में शराबबंदी को नाकाम करने की कोशिश अधिकारियों की मिलीभगत से हो रही है. ऐसे में सीएम नीतीश कुमार की बड़ी बैठक के बीच ही उनके ही एक आपूर्ति पदाधिकारी का इस तरह शराब का सेवन करने से एक बार फिर विपक्ष को बड़ा मौका मिल गया है.

गौरतलब है कि आज ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने समीक्षा बैठक को लेकर सीएम नीतीश से 15 सवाल पूछे हैं. तेजस्वी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है- ‘शराबबंदी पर माननीय मुख्यमंत्री जी से मेरे कुछ ज्वलंत सवाल है. आशा है आज की समीक्षा बैठक से पूर्व वो इनका उत्तर देंगे अन्यथा बैठक में इन पर विमर्श करेंगे. अगर ऐसा नहीं होगा तो फिर यह विशुद्ध नौटंकी होगी.

तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार से पूछे ये सवाल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी बताए कि वो शराबबंदी पर आज कौन से नंबर की समीक्षा बैठक कर रहे है? क्या यह 1100वीं समीक्षा बैठक है? विगत 6 वर्ष में शराबबंदी पर की गयी पूर्व की हज़ारों समीक्षा बैठकों का क्या परिणाम निकला? मुख्यमंत्री शराबबंदी के नाम पर लाखों ग़रीबों-दलितों को जेल में डाल चुके है लेकिन वो बताएँ कि अब तक उन्होंने शराब की पूर्ति करने वाले कितने माफिया, कारोबारी, तस्करों और अधिकारियों को जेल भिजवाया है? अगर नहीं तो क्यों? क्या यह क़ानून गरीब पर ही लागू होता है?

नीतीश सरकार शराब माफिया के साथ मिलीभगत के चलते न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करती जिससे एक-आध माफिया जो पकड़ाया जाता है उसे बरी होने में आसानी होती है. मुख्यमंत्री अगर शराबबंदी को लेकर गंभीर है तो वो बताएँ शराबबंदी के कितने मामलों में हारने के बाद बिहार सरकार ने उच्चतम न्यायालय में अपील की है? मुख्यमंत्री जी, बताएं शराबबंदी के नाम पर आज तक कितने डीएसपी और एसपी स्तर के अधिकारी बर्खास्त हुए है? क्या शीर्ष पुलिस अधिकारी शराबबंदी के प्रति जवाबदेह नहीं है?

मुख्यमंत्री जी, बताएं शराबबंदी के नाम पर वो सिर्फ़ सिपाहियों को ही क्यों निलंबित करते है? निलंबित करने बाद उन्हीं 80% सिपाहियों को दुबारा बहाल क्यों करते है? अगर उन अधिकांश सिपाहियों की कोई गलती नहीं होती तो फिर उनके निलंबन का नाटक क्यों रचते है? क्या इसलिए कि शीर्ष अधिकारी बच जाए और सिपाहियों को निलंबित कर कुछ समय तक मामला ठंडा कर दिया जाए?

मुख्यमंत्री जी बताए, शपथ लेने वाले अधिकांश पुलिसकर्मी और जेडीयू नेता शराब क्यों पीते है? मुख्यमंत्री जी अगर शराबबंदी की लेकर गंभीर है तो हमारे द्वारा सदन में साक्ष्य प्रस्तुत करने के बाद मंत्री रामसूरत राय और उनके भाई के ख़िलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो पायी? हम शराबबंदी में सहयोग करते है, लेकिन आप दोषयों पर कार्रवाई क्यों नहीं करते हैं ? आपके राष्ट्रीय अध्यक्ष के करीबी, जेडीयू के वरिष्ठ नेतागण, सीतामढ़ी के उपाध्यक्ष, नालंदा के प्रखंड अध्यक्ष, सहित श्याम बहादुर सिंह जैसे अनेक विधायकों और आपके करीबी नेताओं के हमने साक्ष्य और video आपके सामने रखे. लेकिन उनके विरुद्ध क्या कारवाई की गयी?

वह शराब माफिया जिसकी वजह से अनेक मौतें हो जाती है, उसके चुनाव जीतने पर आपकी पूरी पार्टी उसे बधाई देने पहुँचती है? यह संबंध क्या कहलाता है? विगत 15 दिनों में विभिन्न जिलों में ज़हरीली शराब से हुई 65 मौतों का दोषी कौन है? शराबबंदी के बावजूद प्रदेश की सीमा के अलावा 4-5 जिलों की सीमा पार कर करोड़ों लीटर शराब गंतव्य स्थल तक कैसे पहुंचती है? अगर बिहार में कथित लाखों लीटर शराब ज़ब्त हुई है, तो वह प्रदेश के अंदर कब, कैसे और क्यों पहुँची? इसमें किसका दोष है? यह किसकी विफलता है?

Source : News18

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