थूक के निशान मिटाने में रेलवे खर्च करता है 1200 करोड़ रुपये, अब विभाग ने खोजे 3 खास उपाय

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पटरियों के जाल के जरिये देश के दूर दराज के शहरों-गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने में भारतीय रेलवे की भूमिका अहम रही है. कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई हो या ताजा कोयला संकट , रेलवे हमेशा अपने संसाधनों के साथ तैयार रहता है. देश को जोड़ने में बड़ा योगदान दे रहा रेलवे भी गुटखे के निशान, हाथियों के साथ हादसे और पटरियों पर मल की हाथों से सफाई की प्रक्रिया जैसी अपनी ही तरह की परेशानियों से जूझ रहा है. लेकिन अब इन मुश्किलों से निपटने के लिए खास तरह के प्लान के साथ तैयार हैं. अब विस्तार से समझते हैं-

गुटखा के दाग मिटाने पर इतना ज्यादा खर्च

अनुमान लगाया जाता है कि भारतीय रेलवे हर साल केवल पीक के दाग मिटाने के लिए 1200 करोड़ रुपये और ढेर सारा पानी खर्च करता है. इनमें खासकर गुटखा और पान खाकर थूकने वालों के निशान शामिल हैं. कोविड-19 के बाद लगी पाबंदियों के बाद भी थूक के निशान बड़ी समस्या हैं. ऐसे में जेब में रखा जा सकते वाला बायोडीग्रेडेबल थूकदान है, जिसका इस्तेमाल बाद में भी किया जा सकता है. इसमें बीज शामिल है, तो जब इसे डिस्पोज किया जाएगा तो इनमें पेड़ लग सकेंगे. लोगों को थूकने से रोकने के लिए 42 स्टेशनों पर वेंडिंग मशीन और कियोस्क लगाए जा रहे हैं, जहां ये थूकदान 5 से 10 रुपये में उपलब्ध होंगे.

हाथियों को डराने के लिए मधुमक्खियां

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने एक लेख में लिखा था, ‘एक सुबह प्रधानमंत्री ने मुझे एक अनोखा सुझाव दिया. उन्होंने सुना था कि हाथी, मधुमक्खियों से डरते हैं और उनकी आवाज से भागते हैं. उन्होंने मुझसे इस बारे में देखने के लिए कहा कि क्या पटरियों पर हाथियों के साथ दुर्घटनाओं को कम करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. पटरियों पर से हाथियों को हटाने के लिए मुधमक्खियों की आवाज का इस्तेमाल कर ‘प्लान बी’ की पहल की गई थी. इस योजना के जरिए मई 2017 से लेकर मई 2021 हाथियों के साथ हादसे काफी कम हुए हैं. 950 से ज्यादा हाथियों की जान बची है.’ नवंबर 2017 में भारतीय रेलवे ने नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवेज (NFR) में हाथियों को ट्रेन की चपेट में आने से बचाने के लिए इसकी शुरुआत की थी.

पटरियों पर हाथ से सफाई की प्रक्रिया बंद

विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी मंत्रालय ने 5 अप्रैल 2021 को कहा था कि पटरियों को साफ करने के लिए अपने आप चलने वाला वाहन तैयार है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च (NITTTR) भोपाल के डॉक्टर शरद के. प्रधान की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, एक मल्टीफंक्शनल रेलवे ट्रैक स्कैवेंजिग व्हीकल तैयार कर लिया गया है. इस वाहन में सूखे और गीले सक्शन सिस्टम, हवा और पानी छिड़कने वाले नॉजल, कंट्रोल सिस्टम समेत अन्य सुविधाएं होंगी. इसमें ड्राइवर के अलावा सफाई के लिए केवल एक ही व्यक्ति की जरूरत होगी.

Source : News18

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