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मुजफ्फरपुर, पताही एयरपोर्ट से हवाई सेवा परिचालन को लेकर केंद्र की और से जमीन की मांग के बाद हर प्रतिनिधि मे इसकी क्रेडिट लेने की होड़ मची हुई है. पूर्व मंत्री -सुरेश शर्मा, नगर विधायक -विजेंद्र चौधरी, वैशाली सांसद -वीणा देवी, काँटी विधायक -मों इसराइल मंसूरी से लेकर मुजफ्फरपुर सांसद अजय निषाद तक इस रेस मे शामिल है. हर प्रतिनिधि अब इसको जल्द से जल्द शुरू करवाने के प्रयास मे लगे हुए है. इसी कड़ी मे मुजफ्फरपुर सांसद अजय निषाद भी नागरिक उड्डयन मंत्री माधव राज सिंधिया से मुलाक़ात की.

मुलाक़ात के बाद उन्होंने बताया की पताही एयरपोर्ट से हवाई सेवा परिचालन को लेकर जब वे नागरिक उड्डयन मंत्री माधव राज सिंधिया से मुलाक़ात की तो उन्होंने कहा की वर्त्तमान में भी वहीं स्थिति है जो 2015 में थी। 2014 में 16 मई को चुनाव परिणाम की घोषणा हुई थी। 26 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार गठन हुआ था । सरकार गठन के बाद से ही मैं पताही हवाई अड्डा से परिचालन को लेकर सक्रीय हो गया था।  उस वक्त नागरिक उड्डयन विभाग के माननीय मंत्री श्री पी. अशोक गजपति राजू जी थे जिन्होंने मेरे पत्रों के आधार पर जांचों उपरान्त मुझे 16 फरवरी 2015 को लिखित अपने पत्र से सूचित किया कि प्रस्तावित विकास योजना के तहत एटीआर-72 / क्यू 400 किस्म के विमान प्रचालन के लिए पहले चरण में 443 एकड तथा ए-320 किस्म के विमान प्रचालन के लिए ईस्टतम विकास हेतु 36 एकड़ भूमि यानि कुल 475 एकड भूमि जो सभी ऋणभारों से मुक्त होगा की आवश्यकता है, एवं भूमि की उपलब्धता को लेकर नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा बिहार सरकार से पहल की जाने की बातें लिखी। तत्पश्चात मैने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस संबध में पत्राचार किया। जो अभी तक CMO Bihar के यहाँ लंबित है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय में श्री गजपति राजू जी (तेलगु देशम पार्टी के नेता) के बाद श्री हरदीप सिंह पूरी जी मंत्री बने थे, श्री पूरी जी पहले नेता नही प्रसाशनिक पदाधिकारी (I.F.S) थे। वे 3 sep 2017 को शहरी विकास मंत्रालय का प्रभार लिये, 09 जून 2018 को राज्यसभा सदस्य बने और 30 मई 2019 को नागरिक उड्डयन मंत्रालय सम्भाला जिस पर वे 20 जुलाई 2021 तक रहे उसके बाद अभी श्री सिंधिया जी मंत्री है।

मै यहाँ स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैंने स्वयं के स्तर से कभी भी आम जन को मुज़फ्फरपुर से हवाई सेवा के परिचालन की ना तो कोई तिथि बताई है ना ही कोई माह  ही बताई क्योकि स्थिति से मैं अवगत हूँ।

भूमि अधिग्रहण का फ़ैसला बिहार सरकार के कैबिनेट को लेना है। मैं बिहार सरकार न हूँ न था। अतः सस्ती लोकप्रियता के लिए व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के बदले सामुहिक प्रयास कर इस मामले को आगे बढ़ाना चाहिए। जो बड़े और वरिष्ठ है उनका सम्मान है ही और आगे भी रहेगा ही। इसका नेतृत्व भी कोई करें, श्रेय भी कोई ले, मुझे इससे फर्क नही पड़ता सवाल जानहित का है अतः जानहित मे सामूहिक तौर पर प्रयास किया जाय।

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