संविधान पर हमला करने वाले ‘फरमान’ पर अल्पसंख्यक आयोग सख्त, मुशावरत ने जताया आभार

संविधान पर हमला करने वाले ‘फरमान’ पर अल्पसंख्यक आयोग सख्त, मुशावरत ने जताया आभार

मुजफ्फरपुर। नक़ाब पहनने वाली महिला ग्राहकों को ज्वेलरी दुकानों में खरीदारी से रोकने वाले कथित और प्रथम दृष्टया फर्जी संगठन के फरमान पर बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने सख़्त रुख अपनाया है। आयोग द्वारा इस अवैधानिक और अलोकतांत्रिक आदेश के खिलाफ जिला प्रशासन व पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए जाने पर ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत बिहार ने आभार व्यक्त किया है।


मुशावरत के बिहार प्रदेश महासचिव मोहम्मद इश्तेयाक ने बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग, पटना एवं उसके चेयरमैन गुलाम रसूल बलियाबी को ईमेल के माध्यम से धन्यवाद देते हुए कहा कि नक़ाब पहनने वाली महिलाओं पर ज्वेलरी दुकानों में खरीदारी का प्रतिबंध लगाना सीधे-सीधे संविधान पर हमला है। उन्होंने आयोग द्वारा मामले की गंभीरता को समझते हुए त्वरित संज्ञान लेने और सख़्त निर्देश जारी करने का स्वागत किया।


मोहम्मद इश्तेयाक ने कहा कि किसी भी संगठन या व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है कि वह महिलाओं को उनके पहनावे के आधार पर अपराधी की तरह पेश करे या धार्मिक पहचान के नाम पर नफ़रत फैलाए। इस तरह के फरमान समाज में सांप्रदायिक तनाव और विभाजन को बढ़ावा देते हैं, जो कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा हैं।


उन्होंने आरोप लगाया कि एक फर्जी संगठन द्वारा कुत्सित और कुंठित मानसिकता के तहत जारी किया गया यह फरमान संविधान के अनुच्छेद 19(ए) और 21 का खुला उल्लंघन है। ऐसे प्रयास न केवल महिलाओं की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता पर चोट करते हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी कमजोर करते हैं।


मुशावरत के महासचिव ने कहा कि महिलाओं की गरिमा, धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान की रक्षा के लिए अल्पसंख्यक आयोग का यह कदम सराहनीय है। इससे आम नागरिकों का संविधान प्रदत्त न्याय व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा।