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मुजफ्फरपुर, निलंबित सिविल सर्जन डा.बीरेन्द्र कुमार ने एसीएमओ डा.एसपी स‍िंह को मंगलवार को प्रभार दिया। साथ ही एएनएम स्कूल सहित अन्य पुरानी फाइलों का निपटारा करने के बाद कार्यालय से निकले। प्रभार के समय एसीएमओ के साथ सीएस कार्यालय के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. सीएस प्रसाद, नोडल पदाधिकारी डा.हसीब अगसर भी मौजूद थे। मीडियाकर्मियों से सीएस ने निलंबन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इतना कहा कि जितना मौका मिला सेवा की।

इधर प्रभार लेने के बाद एसीएमओ ने कहा कि एईएस के प्रति जागरूकता व बचाव की सुविधा हर पीएचसी में सुनिश्चित करने के साथ मड़वन पीएचसी को माडल पीएचसी बनाया जाएगा। सदर अस्पताल में रोस्टर व्यवस्था सही तरीके से लागू होगी। इसके साथ जिलाधिकारी प्रणव कुमार की निगरानी में इस माह सदर अस्पताल में आइओटी खोलने की कवायद है। एसीएमओ ने बताया कि कोरोना के साथ नियमित टीकाकरण को गति दी जाएगी। साथ ही आइओटी को लेकर गठित टीम ने मंगलवार को स्थल का निरीक्षण किया। वहां आने वाले दिनों में जरूरी उपस्कर लगाए जाएंगे।

54 द‍िनों को रहा कार्यकाल

डा.बीरेन्द्र सि‍र्फ 54 द‍िन ही सीएस की कुर्सी पर रह पाए। जानकारी के अनुसार एईएस की तैयारी में लापरवाही को लेकर सिविल सर्जन डा.बीरेन्द्र कुमार को निलंबित किया गया है। 15 फरवरी को योगदान व 10 अप्रैल को निलंबन हो गए। इस दौरान उनके कार्यशैली पर सवाल उठा। पिछले दिनों एंटीजन कीट के कालाबाजारियों को योगदान कराने के बाद वह चर्चा में आए थे। जो जानकारी सामने आई उसके हिसाब से पिछले दिनों प्रधान सचिव प्रत्य अमृत के निरीक्षण के दौरान वह नहीं मिले। प्रधान सचिव ने जब जमीनी तैयारी की हकीकत देखी तो दंग रह गए। प्रचार-प्रसार से लेकर रोस्टर तक की खामियां दिखी।

सिविल सर्जन पर आरोप है कि सात अप्रैल को एईएस को लेकर समीक्षा में वह मौजूद नहीं थे और उन्होंने इसकी सूचना भी नहीं दी थी। इसके अलावा आठ अप्रैल को प्रधान सचिव के निरीक्षण में भी सीएस मौजूद नहीं थे। इससे पहले भी जिलाधिकारी ने एईएस की बैठक में सीएस के देर से आने पर नाराजगी जतायी थी। जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक जिलाधिकारी ने अपने स्तर से सीएस की कार्यशैली को लेकर मुख्यालय को रिपोर्ट की थी।

इनपुट : जागरण

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