मुजफ्फरपुर में गायघाट थाना क्षेत्र की घटना के बाद पुलिस प्रशासन लगातार एक्शन में नजर आ रहा है। इसी कड़ी में मुजफ्फरपुर पुलिस ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सोशल मीडिया और विभिन्न न्यूज़ चैनलों पर चल रही भ्रामक खबरों पर स्थिति स्पष्ट की है।
पुलिस ने साफ कहा है कि “गोली चलाने वाले थानेदार को पुरस्कार दिए जाने” की खबर पूरी तरह गलत और तथ्यों से परे है। दरअसल, फरवरी 2026 में पुलिस उप-महानिरीक्षक (मानवाधिकार), बिहार पटना के निर्देश पर विभिन्न जिलों से उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों के नाम वीर पुप्पुनाथ मेडल और प्रशस्ति पत्र के लिए मांगे गए थे। इसी प्रक्रिया के तहत मुजफ्फरपुर से भी कुछ नाम भेजे गए थे, जिनमें गायघाट के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह का नाम भी शामिल था।
लेकिन 17-18 मार्च 2026 को चोरनियां गांव में छापेमारी के दौरान हुई हिंसक झड़प और एक ग्रामीण जगतवीर राय की मौत के बाद पूरा मामला बदल गया। जांच में सामने आया कि छापेमारी के दौरान पुलिस टीम द्वारा समुचित और संतुलित कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों के भारी विरोध, पथराव और तनावपूर्ण स्थिति के बीच हालात बिगड़ गए, जिसमें फायरिंग की घटना भी हुई।
इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उप-महानिरीक्षक, तिरहुत क्षेत्र ने तत्काल प्रभाव से राजा सिंह को प्रस्तावित पुरस्कार से वंचित कर दिया। साथ ही, मामले में लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में थानाध्यक्ष राजा सिंह सहित कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। अन्य संबंधित कर्मियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
पुलिस प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी आरोपी या विवादित अधिकारी को सम्मानित करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। आम जनता से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी अपुष्ट खबर को साझा करने से बचें।
साथ ही, यदि कोई व्यक्ति भ्रामक जानकारी फैलाता है, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
