मुजफ्फरपुर। जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बार फिर कड़ा कदम उठाया है। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति पर सख्ती से अमल करते हुए जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के आदेश पर डीसीएलआर मुजफ्फरपुर पश्चिमी कार्यालय में पदस्थापित कार्यपालक सहायक राकेश रंजन को सेवा से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया है।
यह कार्रवाई कार्यालय में अवैध राशि के लेन-देन से जुड़े एक वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद की गई है। बताया जाता है कि 3 फरवरी को सामने आए इस वीडियो में कार्यपालक सहायक पर रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगे थे। वीडियो के संज्ञान में आते ही जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित जांच के आदेश दिए और जांच की जिम्मेदारी भूमि सुधार उपसमाहर्ता, मुजफ्फरपुर पश्चिमी को सौंपी।
जांच के दौरान वायरल वीडियो, कार्यालय की कार्यप्रणाली, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की गहन समीक्षा की गई। साथ ही संबंधित कर्मी से स्पष्टीकरण भी मांगा गया, लेकिन कार्यपालक सहायक द्वारा अपने बचाव में कोई ठोस तथ्य या संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया जा सका। जांच प्रतिवेदन में आरोपों को गंभीर मानते हुए इसे सरकारी कार्यालय की गरिमा और प्रशासनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य बताया गया।
जांच रिपोर्ट प्राप्त होते ही जिलाधिकारी ने बिना विलंब कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया। जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि सरकारी कार्यालयों में कार्यरत सभी अधिकारी और कर्मचारी सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने यह भी दोहराया है कि भविष्य में यदि किसी भी कर्मी के विरुद्ध अनियमितता की शिकायत सामने आती है, तो निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
