15 फरवरी को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि, दुर्लभ ग्रह-नक्षत्र संयोग से बना विशेष महापर्व

15 फरवरी को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि, दुर्लभ ग्रह-नक्षत्र संयोग से बना विशेष महापर्व

फाल्गुन कृष्ण पक्ष में जब दिन में त्रयोदशी और रात्रि में चतुर्दशी तिथि होती है, तब महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इसी पावन संयोग के तहत इस वर्ष रविवार, 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का महापर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। यह जानकारी फलित दर्शन ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित प्रभात मिश्रा ने दी।


पंडित प्रभात मिश्रा के अनुसार, इस दिन त्रयोदशी तिथि दिन में 3:59 बजे तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्दशी तिथि आरंभ हो जाएगी। चूंकि रात्रि में चतुर्दशी तिथि रहेगी, इसलिए शास्त्रसम्मत रूप से यही रात्रि शिवरात्रि कहलाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह तथा शिव-शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है।


इस वर्ष की महाशिवरात्रि को और भी विशेष बनाता है ग्रहों का दुर्लभ संयोग। पंडित मिश्रा के अनुसार, सूर्य, बुध, राहु और शुक्र — ये चारों ग्रह कुंभ राशि में एक साथ विराजमान रहेंगे, जिसे एक महा संयोग माना जा रहा है। साथ ही उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के बाद रात्रि 7:26 बजे से श्रवण नक्षत्र का प्रारंभ होगा, जो इस पर्व को और अधिक फलदायी बनाता है।


महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। दिन से लेकर रात्रि तक भगवान शिव की उपासना की जाती है। रात्रि के समय महा रुद्राभिषेक, लघु रुद्राभिषेक और शिव-शक्ति की संयुक्त आराधना अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन की गई पूजा संतान प्राप्ति, सौभाग्य वृद्धि, रोग निवारण, गृह क्लेश समाप्ति और मांगलिक कार्यों की सिद्धि में सहायक होती है।


पंडित प्रभात मिश्रा बताते हैं कि भगवान शिव को आशुतोष कहा जाता है, क्योंकि वे शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यदि इस दिन श्रद्धा भाव से बेलपत्र और दूध अर्पित कर शिव पूजन किया जाए, तो निश्चित रूप से सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं।


विशेष रूप से कुंवारी कन्याएं, जिनके विवाह में बाधाएं आ रही हों, अथवा दांपत्य जीवन में तनाव झेल रहे दंपती, यदि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना करते हैं, तो उनके जीवन में सुख-शांति और स्थिरता आती है।


इस प्रकार, वर्ष 2026 की महाशिवरात्रि न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि ज्योतिषीय रूप से भी अत्यंत अद्भुत और फलदायी मानी जा रही है।