मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने न सिर्फ इंसानियत को शर्मसार किया बल्कि पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड 17 के बालूघाट गली नंबर तीन की रहने वाली 31 वर्षीय फूलो देवी की हत्या कर उसका शव बोरे में बंद कर नदी किनारे फेंक दिया गया। वजह—घर में बेटा नहीं होना।
शुक्रवार को आश्रमघाट के पास बूढ़ी गंडक में गिरने वाले नाले के मुहाने पर यह खौफनाक राज तब खुला, जब कुत्तों ने बोरे को नोचना शुरू किया। नदी किनारे क्रिकेट खेल रहे बच्चों की नजर शव पर पड़ी और शोर मचते ही इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना पर सिकंदरपुर पुलिस मौके पर पहुंची। कुछ ही देर में सिटी एसपी मो. मोहिबुल्लाह अंसारी और एसडीपीओ टाउन-1 सुरेश कुमार भी घटनास्थल पर पहुंचे।
शव की पहचान फूलो देवी के भाई शिवनाथ साह ने की। उन्होंने बताया कि फूलो 22 जनवरी से लापता थी। परिवार ने आशंका जताई थी कि उसकी हत्या की नीयत से अपहरण किया गया है। इसको लेकर 25 जनवरी को सिकंदरपुर थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी, जिसमें पति संतोष साह और उसके तीन भाइयों को नामजद किया गया था।
परिवार का आरोप है कि एफआईआर के बाद भी पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। न पति से पूछताछ हुई, न ही अन्य आरोपियों से। इसी दौरान फूलो की हत्या कर शव को ठिकाने लगा दिया गया। एफएसएल जांच के बाद सिटी एसपी ने बताया कि शव तीन से चार दिन पुराना प्रतीत हो रहा है, जिससे आशंका है कि एफआईआर के बाद ही वारदात को अंजाम दिया गया।
बताया गया कि आरोपी संतोष साह कृष्णा टॉकीज के सामने जूस का ठेला लगाता है। शव बरामद होने के बाद पुलिस ने छापेमारी शुरू की, लेकिन संतोष और उसके भाई पिछले तीन दिनों से फरार हैं। एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि समाज में गहरी जड़ जमाए लैंगिक भेदभाव और व्यवस्था की सुस्ती का आईना है—जहां एक महिला की जान ‘बेटा नहीं होने’ की सनक में ले ली गई।
