जिलाधिकारी का बड़ा एक्शन: तत्कालीन सीओ पर निलंबन की अनुशंसा, दो राजस्व कर्मचारी निलंबित
अनियमितता पर ‘जीरो टॉलरेंस’—गायघाट में निलंबन, मुसहरी में सरकारी आवास में रहने का अल्टीमेटम
मुजफ्फरपुर | 13 नवंबर 2026 | Tirhut Now
मुजफ्फरपुर जिले में सरकारी भूमि के दुरुपयोग और राजस्व अनियमितताओं के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की है। मोतीपुर अंचल अंतर्गत बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) की 16.86 एकड़ सरकारी भूमि को अवैध रूप से निजी व्यक्तियों के नाम जमाबंदी किए जाने के गंभीर मामले में जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कड़ा रुख अपनाया है।
जिलाधिकारी ने तत्कालीन अंचलाधिकारी मोतीपुर रुचि कुमारी के निलंबन की अनुशंसा संबंधित विभाग से की है, जबकि राजस्व कर्मचारी नागेंद्र प्रसाद ठाकुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ गठित कर विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय अंचल कार्यालय औराई निर्धारित किया गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि “सरकारी भूमि के साथ किसी भी तरह की अनियमितता, लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर कठोरतम कार्रवाई होगी।”
जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं
मामले के उजागर होते ही जिलाधिकारी ने अपर समाहर्ता राजस्व श्री प्रशांत कुमार से जांच कराई। जांच प्रतिवेदन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए—
• 7 मई 2025 को ऑनलाइन परिमार्जन प्लस के माध्यम से
° 9.56 एकड़ भूमि एक निजी व्यक्ति के नाम
° 7.30 एकड़ भूमि दूसरे निजी व्यक्ति के नाम
अवैध रूप से जमाबंदी कर दी गई।
• यह जमाबंदी बिना किसी ऑफलाइन अभिलेख, वैध दस्तावेज या कानूनी प्रक्रिया के की गई।
• जमाबंदी की अनुशंसा राजस्व कर्मचारी द्वारा की गई और तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा ऑनलाइन स्वीकृति दी गई।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि मौजा बरियारपुर में कुल 61.33 एकड़ भूमि पूर्व में मोतीपुर शुगर फैक्ट्री के नाम दर्ज थी, जिसे नियमानुसार बियाडा को हस्तांतरित किया गया।
• 7.98 एकड़ भूमि का दाखिल-खारिज बियाडा के पक्ष में पूर्ण हो चुका था।
• शेष 53.35 एकड़ भूमि के लिए प्रक्रिया जारी थी।
इसी दौरान 16.86 एकड़ भूमि की अवैध जमाबंदी कर दी गई।
जांच रिपोर्ट में इस पूरे प्रकरण को पूर्णतः अवैधानिक, विभागीय नियमों के विरुद्ध और गंभीर कदाचार की श्रेणी में रखा गया है।
नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
जांच रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 1976 के नियम 3(1) के तहत—
• राजस्व कर्मचारी नागेंद्र प्रसाद ठाकुर को निलंबित किया गया
एक सप्ताह के भीतर प्रपत्र ‘क’ में आरोप गठित कर विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश
• तत्कालीन सीओ रुचि कुमारी के विरुद्ध भी निलंबन/विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा
• राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने उनसे स्पष्टीकरण भी तलब किया है
गायघाट में भी राजस्व कर्मचारी निलंबित
इसी क्रम में गायघाट अंचल के राजस्व कर्मचारी अवधेश कुमार सिंह को भी—
• कर्तव्यहीनता
• लापरवाही
• वरीय पदाधिकारी के आदेशों की अवहेलना
के आरोप में निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पारु अंचल रहेगा।
जांच में सामने आया कि—
• बाढ़ और चुनाव जैसे महत्वपूर्ण समय पर वे बिना सूचना अनुपस्थित रहे
• विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान सेक्टर पदाधिकारी का दायित्व निभाने में गंभीर लापरवाही बरती
• मोबाइल फोन बंद रहने से चुनावी व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति बनी
मुसहरी सीओ व आरओ को सरकारी आवास में रहने का आदेश
राजस्व कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी ने मुसहरी अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारी को—
• दामुचक स्थित सरकारी आवास में अनिवार्य रूप से रहने का निर्देश दिया है
• आदेश की अवहेलना पर फरवरी माह के वेतन की निकासी पर रोक लगाने की चेतावनी दी गई है
राजस्व मामलों पर जिलाधिकारी की सख्त निगरानी
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन द्वारा—
• दाखिल-खारिज
• परिमार्जन प्लस
• भूमि मापी
• अभियान बसेरा
जैसे जनहित से जुड़े मामलों की साप्ताहिक समीक्षा, फील्ड विजिट और निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।
उन्होंने दो टूक कहा कि “जहां प्रक्रियाएं सरल की जा रही हैं, वहीं अनियमितता पर बिना दबाव कठोर कार्रवाई होगी। सरकारी भूमि की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”
संदेश साफ है
मोतीपुर, गायघाट और मुसहरी की यह कार्रवाई बताती है कि अब
सरकारी भूमि की लूट, नियमों की अनदेखी और कर्तव्यहीनता पर ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति लागू है। जहां एक ओर दोषियों में हड़कंप है, वहीं आम जनता का प्रशासन पर भरोसा और मजबूत हुआ है।

