होली हिंदू धर्म का प्रमुख और अत्यंत लोकप्रिय पर्व है, जिसे देशभर में रंग, उल्लास और भाईचारे के साथ मनाया जाता है। हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन और उसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। लेकिन वर्ष 2026 में होली की तिथि को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसकी वजह है पूर्णिमा तिथि पर भद्रा और चंद्रग्रहण का विशेष संयोग।
फलित दर्शन ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के ज्योतिषाचार्य पंडित प्रभात मिश्र के अनुसार, इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026, सोमवार को शाम 6 बजकर 18 मिनट से प्रारंभ होकर 3 मार्च की सुबह 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है, लेकिन भद्रा के पुच्छ काल में दहन करना शुभ फलदायी होता है।
पंडित मिश्र ने बताया कि 2 मार्च की रात 9:00 बजे से प्रातः 3:00 बजे तक भद्रा का पुच्छ काल रहेगा, जो होलिका दहन के लिए उत्तम समय है। अतः श्रद्धालु 2 मार्च की रात्रि में विधि-विधान के साथ होलिका दहन कर सकते हैं। इस दौरान पूजा-अर्चना और पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।
वहीं 3 मार्च, मंगलवार को शाम 6:00 बजे से 6:48 बजे तक चंद्रग्रहण लगेगा। ग्रहण का सूतक काल लगभग 9 घंटे पूर्व आरंभ हो जाएगा, जिससे धार्मिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ेगा। चूंकि पूर्णिमा तिथि 3 मार्च की सुबह तक ही रहेगी और ग्रहण का प्रभाव भी उसी दिन रहेगा, इसलिए रंगों की होली 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ग्रहण और भद्रा जैसे संयोगों के कारण तिथियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन पंचांग और शास्त्रीय गणना के आधार पर सही तिथि निर्धारित की जाती है।
इस प्रकार, होलिका दहन 2 मार्च की रात और रंगों की होली 4 मार्च को पूरे उत्साह के साथ मनाई जाएगी। श्रद्धालुओं से अपील है कि वे शुभ मुहूर्त में ही धार्मिक अनुष्ठान करें और सुरक्षित व पारंपरिक तरीके से पर्व का आनंद लें।
होली का यह पर्व एक बार फिर बुराई पर अच्छाई की विजय और सामाजिक समरसता का संदेश लेकर आ रहा है।
