भ्रष्टाचार पर डीएम का बड़ा प्रहार: मीनापुर की महिला पर्यवेक्षिका नियोजन मुक्त, सीडीपीओ के निलंबन की अनुशंसा

भ्रष्टाचार पर डीएम का बड़ा प्रहार: मीनापुर की महिला पर्यवेक्षिका नियोजन मुक्त, सीडीपीओ के निलंबन की अनुशंसा

मुजफ्फरपुर | 20 जनवरी 2026 | Tirhut Now


मुजफ्फरपुर जिले में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मीनापुर बाल विकास परियोजना कार्यालय से जुड़े एक गंभीर मामले में जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने महिला पर्यवेक्षिका अर्चना कुमारी को तत्काल प्रभाव से नियोजन मुक्त कर दिया है। यह कार्रवाई अवैध राशि की मांग, अनुशासनहीनता और अत्यंत खराब कार्य निष्पादन के आरोपों के सत्यापन के बाद की गई।


दरअसल, महिला पर्यवेक्षिका द्वारा सरकारी कार्य के एवज में अवैध राशि मांगे जाने से जुड़ी एक ऑडियो क्लिप सामने आई थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर कराई गई जांच में यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुआ कि उक्त ऑडियो में अवैध मांग अर्चना कुमारी द्वारा ही की गई थी। जांच रिपोर्ट में इसे गैर-कानूनी, अनैतिक और सेवा नियमों का घोर उल्लंघन बताया गया।


इसके साथ ही दिसंबर 2025 की विभागीय समीक्षा में मीनापुर बाल विकास परियोजना का प्रदर्शन भी अत्यंत असंतोषजनक पाया गया। टीएचआर वितरण, गर्म भोजन योजना, पोषण ट्रैकर, नियमित टीकाकरण, किशोरियों और बच्चों की वृद्धि निगरानी जैसे महत्वपूर्ण सूचकांकों में परियोजना जिले के औसत से काफी पीछे रही। निरीक्षण कार्यों में भी गंभीर लापरवाही उजागर हुई।


मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मीनापुर के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) राजेश कुमार सिंह के विरुद्ध भी निलंबन एवं विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा समाज कल्याण विभाग से की है। सीडीपीओ पर आंगनबाड़ी सेविकाओं से अवैध वसूली, बेहद कम निरीक्षण और योजनाओं के क्रियान्वयन में उदासीनता के आरोप हैं।


जिलाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी कार्यों में अनियमितता, भ्रष्टाचार और लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी चाहे किसी भी स्तर का हो, उसके विरुद्ध सख्त और त्वरित कार्रवाई तय है। यह कार्रवाई प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।