समाहरणालय और कंबाइंड बिल्डिंग में जल्द खुलेगी दीदी की रसोई, हजारों लोगों को मिलेगा सीधा लाभ

समाहरणालय और कंबाइंड बिल्डिंग में जल्द खुलेगी दीदी की रसोई, हजारों लोगों को मिलेगा सीधा लाभ

मुजफ्फरपुर | 02 जनवरी 2026


बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी आजीविका एवं महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजना जीविका के तहत संचालित ‘दीदी की रसोई’ का मुजफ्फरपुर जिले में लगातार विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में नववर्ष 2026 के जनवरी माह में जिले में दीदी की रसोई की दो नई इकाइयों की शुरुआत की जाएगी। इन इकाइयों के लिए समाहरणालय परिसर और कंबाइंड बिल्डिंग का चयन कर लिया गया है। दोनों स्थानों पर रसोई के संचालन से सरकारी कार्यों से आने वाले आम नागरिकों, कर्मचारियों एवं आगंतुकों को किफायती दर पर स्वच्छ, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध हो सकेगा।


दीदी की रसोई की नई इकाइयों के शुभारंभ और उसके सुचारू संचालन को लेकर शुक्रवार को जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जीविका की जिला टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि समाहरणालय और कंबाइंड बिल्डिंग जैसे व्यस्त प्रशासनिक केंद्रों पर दीदी की रसोई का संचालन आमजन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। उन्होंने सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करते हुए जनवरी माह में दोनों इकाइयों के संचालन का निर्देश दिया, ताकि लोगों को जल्द से जल्द सुविधा मिल सके।


गौरतलब है कि मुजफ्फरपुर जिले में दीदी की रसोई का संचालन पहले से ही सफलतापूर्वक किया जा रहा है। वर्तमान में जिले के विभिन्न सरकारी संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर कुल 12 दीदी की रसोई कार्यरत हैं। इनमें 161 जीविका दीदियां तथा 37 सहयोगी कर्मी प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं। इन रसोईयों के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 2758 उपभोक्ता जलपान एवं भोजन ग्रहण कर रहे हैं, जो इस योजना की लोकप्रियता और विश्वसनीयता को दर्शाता है।


दीदी की रसोई न केवल रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम बन रही है, बल्कि यह गुणवत्तापूर्ण, पोषणयुक्त और स्वादिष्ट भोजन की सुलभता भी सुनिश्चित कर रही है। वर्तमान में जिले के जिन प्रमुख स्थानों पर दीदी की रसोई संचालित है, उनमें जिला अस्पताल संस्थागत बैग क्लस्टर, रजिस्ट्री कार्यालय, बालक आवासीय विद्यालय पोखरैरा, गर्ल्स रेजिडेंशियल स्कूल रजवाड़ा, मुरौल एवं बोचहा, एसकेएमसीएच, पुलिस लाइन, बीएसएपी-6 पुलिस लाइन, ओल्ड एज होम और कर्पूरी भोजनालय शामिल हैं।


भौगोलिक दृष्टि से देखें तो जिले की आठ दीदी की रसोई मुसहरी प्रखंड, एक सरैया प्रखंड और तीन बोचहा प्रखंड में स्थित हैं। इन रसोईयों से सरकारी कर्मियों के साथ-साथ विद्यार्थियों, मरीजों, वृद्धजनों और आम नागरिकों को भी कम कीमत पर स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।


दीदी की रसोई जीविका की एक शुल्क आधारित भोजन एवं जलपान व्यवस्था है, जिसमें स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं भोजन तैयार कर उसकी बिक्री करती हैं। पूरी व्यवस्था स्वच्छता, गुणवत्ता और पोषण के निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित की जाती है। इससे एक ओर महिलाओं को नियमित रोजगार और आय का स्रोत मिलता है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को बाजार की तुलना में कम कीमत पर बेहतर भोजन उपलब्ध हो पाता है।


इस योजना का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि इससे जुड़ी महिलाओं की आर्थिक स्थिति और आत्मनिर्भरता में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है। नियमित आय से जीविका दीदियों का आत्मविश्वास बढ़ा है और उन्हें सामाजिक सम्मान भी प्राप्त हो रहा है।


बैठक के दौरान जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कहा कि दीदी की रसोई जैसी योजनाएं महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। प्रशासन की प्राथमिकता है कि जिले के अधिक से अधिक सार्वजनिक स्थलों पर इस योजना का विस्तार किया जाए, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हों और आम लोगों को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन सुविधा मिल सके।


जनवरी माह में समाहरणालय परिसर और कंबाइंड बिल्डिंग में दो नई दीदी की रसोई के शुरू होने के साथ ही जिले में इसकी संख्या और बढ़ जाएगी। इससे न केवल जीविका दीदियों को अतिरिक्त रोजगार मिलेगा, बल्कि जिला मुख्यालय आने वाले हजारों लोगों को भी इसका सीधा लाभ प्राप्त होगा। कुल मिलाकर, दीदी की रसोई मुजफ्फरपुर में विकास, आजीविका और सामाजिक सरोकारों को जोड़ने वाली एक सफल और प्रेरक पहल के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है।