मुजफ्फरपुर। जिले के प्रमुख मठ-मंदिरों की जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिला प्रशासन ने निर्णय लिया है कि जिले के 86 मठ-मंदिरों के चारों ओर चहारदीवारी का निर्माण कराया जाएगा। इस योजना में शहर के प्रसिद्ध बाबा गरीबनाथ मंदिर, सर्वेश्वर नाथ मंदिर और रानी सती मंदिर सहित कई अन्य धार्मिक स्थल शामिल हैं।
जिला योजना पदाधिकारी ने स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के कार्यपालक अभियंता को पत्र भेजकर सभी चिन्हित मठ-मंदिरों का स्थल निरीक्षण कर प्राक्कलन तैयार करने और तकनीकी स्वीकृति के साथ प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया है। इसके लिए प्रशासन ने मठ-मंदिरों की सूची और उपलब्ध भूमि का रकबा भी उपलब्ध करा दिया है, ताकि उसी आधार पर निर्माण की योजना तैयार की जा सके।
दरअसल जिले में कई मठ-मंदिरों की जमीन पर वर्षों से अतिक्रमण की शिकायतें सामने आती रही हैं। प्रशासन का मानना है कि चहारदीवारी बनने के बाद इन धार्मिक स्थलों की जमीन सुरक्षित रहेगी और जहां अतिक्रमण हो चुका है, वहां सीमांकन कर उसे हटाने की कार्रवाई भी आसान होगी।
मठ-मंदिरों की सूची जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त और जिला योजना पदाधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से तैयार की गई है। हालांकि कुछ मंदिरों की जमीन का रकबा अभी स्पष्ट नहीं है। इनमें बाबा गरीबनाथ मंदिर, चतुर्भुज स्थान मंदिर, कटरा चामुंडा स्थान और कन्हौली स्थित अजरकवै मठ शामिल हैं, जिनकी भूमि का सटीक विवरण प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं हो पाया है।
प्रशासनिक सूची के अनुसार बोचहां, मुशहरी, कांटी, कुढ़नी, मड़वन, मीनापुर, पारू, मोतीपुर, सरैया, बंदरा, गायघाट, औराई, सकरा और कटरा प्रखंडों में स्थित कुल 86 मठ-मंदिरों को इस योजना में शामिल किया गया है। अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर स्थल निरीक्षण कर निर्माण का प्राक्कलन तैयार करने को कहा गया है, ताकि कार्य में किसी प्रकार की त्रुटि न हो।
बताया जाता है कि जिले में राम-जानकी मठ की जमीन पर सबसे अधिक अतिक्रमण का मामला पहले सामने आ चुका है। प्रशासन अब सीमांकन कर चहारदीवारी बनवाने की तैयारी में है, जिससे भविष्य में इन धार्मिक स्थलों की भूमि पर अवैध कब्जे की संभावना लगभग खत्म हो सके।
