पुलिस पिटाई का आरोप: सरपंच मामला पहुँचा मानवाधिकार आयोग, निष्पक्ष जाँच की माँग

पुलिस पिटाई का आरोप: सरपंच मामला पहुँचा मानवाधिकार आयोग, निष्पक्ष जाँच की माँग

मुजफ्फरपुर : जिले के पियर थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़गांव गांव के सरपंच लालबाबू सहनी की कथित रूप से पुलिस द्वारा बेरहमी से पिटाई किए जाने का मामला अब राष्ट्रीय एवं राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुँच गया है। पीड़ित सरपंच ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा के माध्यम से आयोग में दो अलग-अलग याचिकाएँ दायर कर पियर थाना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है।


याचिका में सरपंच लालबाबू सहनी ने आरोप लगाया है कि बीते 6 फरवरी को पियर थाना के पुलिसकर्मी उनके गांव के चौक पर कथित रूप से अवैध वसूली कर रहे थे। इसकी जानकारी मिलने पर जब वे मौके पर पहुँचे और स्थिति की जानकारी लेने का प्रयास किया, तो मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी और उन्हें जबरन नजरबंद कर लिया।


पीड़ित का आरोप है कि इसके बाद पियर थाना के कई पुलिसकर्मियों एवं पदाधिकारियों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की, जिसमें उनका हाथ-पैर टूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि थानाध्यक्ष रजनीकांत सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया। इतना ही नहीं, उन्हें बचाने आई उनकी भाभी के साथ भी मारपीट की गई, जिससे उनका हाथ टूट गया।
याचिका में पुलिसकर्मी अखिलेश कुमार, कमलेश्वर नाथ मिश्रा, धर्मेंद्र त्यागी, कुंदन कुमार, प्रिंस कुमार सहित एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित के अनुसार, घटना के दौरान महिलाओं और बच्चों के साथ भी बर्बरता की गई तथा उन्हें बेहोश होने तक पीटा गया।


सरपंच लालबाबू सहनी का यह भी आरोप है कि घटना के दौरान पुलिस ने ग्रामीणों को डराने के उद्देश्य से तीन-चार राउंड फायरिंग की। बाद में स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें एसकेएमसीएच, मुजफ्फरपुर में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज हुआ।


पीड़ित का कहना है कि घटना के बाद पियर थाना पुलिस ने उन्हें और कई निर्दोष ग्रामीणों को झूठे मुकदमों में फँसाते हुए नामजद प्राथमिकी दर्ज कर दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पियर थाना क्षेत्र में नियमित रूप से अवैध वसूली की जाती है और आम लोगों को झूठे मामलों में फँसाने की धमकी देकर पैसे की उगाही की जाती है, जिससे पूरे इलाके में भय और दहशत का माहौल बना हुआ है।


मामले की पैरवी कर रहे मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा ने कहा कि यह घटना मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है और पुलिस तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि जिन पर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जिम्मेदारी है, यदि वही इस प्रकार की अमानवीय हरकतों में संलिप्त पाए जाते हैं, तो यह अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जाँच की माँग करते हुए दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की आवश्यकता बताई।