रामपुरहरि थाना क्षेत्र में पुलिस की “कस्टडी सिक्योरिटी” उस वक्त हवा हो गई, जब शराब मामले में पकड़ा गया युवक इलाज के बहाने ऐसा फिसला कि पुलिस देखती ही रह गई। एसकेएमसीएच ले जाए गए आरोपी ने हथकड़ी को ऐसे सरकाया, मानो वो ताले नहीं, रबर की बनी हो—और अस्पताल परिसर से रफूचक्कर हो गया।
फरार युवक की पहचान टेंगराहां गोसाइपुर निवासी विपुल कुमार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के बाद विपुल की तबीयत अचानक ऐसी बिगड़ी कि पुलिस को उस पर तरस आ गया और सीधे इलाज के लिए अस्पताल रवाना कर दिया गया। पूछताछ में टीबी जैसी बीमारी का हवाला भी सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने मानवता दिखाते हुए मेडिकल कॉलेज की राह पकड़ ली।
लेकिन असली कहानी अस्पताल पहुंचते ही शुरू हुई। आरोपी की निगरानी में लगे दो चौकीदारों में से एक को अचानक “भोजन प्रेम” जाग उठा और वह खाने चला गया। दूसरा चौकीदार अकेले ही विपुल की पहरेदारी करता रह गया। बस फिर क्या था—विपुल ने मौके की नजाकत समझी, हथकड़ी सरकाई और इलाज शुरू होने से पहले ही ऐसा गायब हुआ, जैसे अस्पताल में कभी आया ही न हो।
जैसे ही फरारी की खबर थाने पहुंची, पुलिस महकमे में भगदड़ मच गई। संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी गई है, मगर फिलहाल विपुल पुलिस से एक कदम आगे ही चल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इतने बड़े घटनाक्रम पर अब तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
यह मामला पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है—कि आरोपी ज्यादा बीमार था या व्यवस्था ज्यादा ढीली? अब देखना दिलचस्प होगा कि विपुल दोबारा कब पुलिस की मेहमाननवाज़ी में लौटता है और इस “लापरवाही एक्सप्रेस” के जिम्मेदारों पर कब गाज गिरती है।

